April 17, 2021
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कोरोना काल में चर्चा में आईं मनरेगा 

डॉ. राजेंद्र कुकसाल आजकल सोशल मीडिया पर मनरेगा चर्चाओं में हैं,  हासिये पर चल रही यह योजना अचानक सुर्खियों में आगयी क्योंकि हुक्मरानों को इस योजना के माध्यम से वेरोजगार प्रवासियों के लिए रोजगार की संभावनाएं दिखाई देने लगी. समय-समय पर मैं मनरेगा योजना से जुड़ा रहा. राज्य में चल रही मनरेगा योजना
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शिक्षक ‘ज्ञानदीप’ है जो जीवनभर ‘दिशा’ देता है

गुरु पूर्णिमा पर विशेष डॉ. अरुण कुकसाल बचपन की यादों की गठरी में यह याद है कि किसी विशेष दिन घर पर दादाजी ने चौकी पर फैली महीन लाल मिट्टी में मेरी दायें करांगुली (तर्जनी) घुमाकर विद्या अध्ययन का श्रीगणेश किया था. स्कूल जाने से पहले घर पर होने वाली इस पढ़ाई को घुलेटा (आज […]
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बहुत कठिन है माँ हो जाना

डॉ. दीपशिखा जैसे-जैसे कोविड-19 भारत में भी अपने पैर फैलाता जा रहा, वैसे-वैसे मेरी एक माँ के तौर पर चिंता बढ़ती जा रही है. ये चिंताएं मुझ तक महदूद नहीं हैं, मेरे जैसी हर माँ सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चे/बच्चों के लिए चिंतित है. ऊपर से जब से प्रेगनेंट हाथी की मौत वाली […]
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पेंटिंग की वैश्विक प्रदर्शनी में उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने किया प्रतिनिधित्व

हिमाँतर डेस्‍क उत्तराखंड के राजेश चंद्र की चित्रकला इनदिनों सुर्खियां बंटोर रही है. हाल ही में विश्व स्तर पर हुई एक प्रदर्शनी में उनकी पेंटिंग को खूब सराहा गया है. इस पेंटिंग में राजेश ने समुद्र बचाओ का संदेश दिया था. राजेश 24 साल के हैं और उनकी पेंटिंग्स को नमामि गंगे व जल शक्ति […]
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सामाजिक दायित्वशीलता निभाने में अग्रणी व्यक्तित्व

डॉ. अरुण कुकसाल ‘‘होम्योपैथिक चिकित्सा रोगी की रोग से लड़ने की शरीर में मौजूद क्षमता को बढ़ाकर रोगी को रोग से मुक्त कराने में साहयता प्रदान करती है. विशेषकर एलर्जिक रोगों के संपूर्ण एवं सुरक्षित उपचार के लिए होम्योपैथी को ऐलोपैथी याने आधुनिक चिकित्सा पद्धति से बेहतर माना जाता है. वर्तमान मानवीय जीवन शैली का […]
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पहाड़ की लोकसंस्कृति को पहचान दी लोक गायक हीरासिंह राणा ने

डॉ. मोहन चन्द तिवारी बहुत ही दुःख की बात है कि कोरोना काल के इस कठिन दौर में “लस्का कमर बांध, हिम्मत का साथ फिर भोल उज्याई होलि, कां ले रोलि रात”- जैसे अपने ऊर्जा भरे बोलों से जन जन को कमर कस के हिम्मत जुटाने का साहस बटोरने और रात के अंधेरे को भगाकर […]
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लोक के चितेरे जनकवि हीरा सिंह राणा

डॉ. अरुण कुकसाल लस्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा, फिर भोला उज्याला होली, कां रोली राता 12 नवम्बर, 2019 की रात वैकुंठ चतुर्दशी मेला, श्रीनगर (गढ़वाल) में गढ़-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन के मंच पर नरेन्द्र सिंह नेगीजी एवं अन्य कवियों के मध्य जनकवि हीरा सिंह राणाजी भी शोभायमान थे. प्रिय मित्र चारू तिवारीजी एवं विभोर बहुगुणाजी […]
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कोरोना जनित संकट: मजदूरों को झेलनी पड़ी सबसे अधिक मुसीबत और बेरोजगारी

अनीता मैठाणी सुख हो, दुख हो, आपद हो, विपद हो बच्चे जब तक माता-पिता के छत्र-छाया में होते हैं सब झेल जाते हैं. क्योंकि माता-पिता अपनी जान पर खेलकर भी अपने नन्हें-मुन्नों को आंच नहीं आने देते. यदि विचार करें तो जनता के लिए सरकारें भी माता-पिता की भूमिका में होते हैं यदि वे इसे स्वीकारें […]
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कोरोना काल : सजग रहकर दूरदर्शी व्यवहार अपनाने का वक्त 

डॉ. अरुण कुकसाल आज के कोरोना काल में पर्वतीय अंचलों के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक जीवन में आने वाली चुनौतियों को समझने से पहले विगत शताब्दी में पहाड़ी गांवों के क्रमबद्ध बदलते मिजाज को मेरे गांव चामी के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं. अपने गांव चामी (असवालस्यूं) पौड़ी गढ़वाल में रहते हुए मैं अभी भी […]
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अपनी संस्कृति से अनजान महानगरीय युवा पीढ़ी

अशोक जोशी पिछले कुछ सालों से मैं उत्तराखंड के बारे में अध्ययन कर रहा हूं और जब भी अपने पहाड़ों के तीज-त्योहारों, मेलों, मंदिरों, जनजातियों, घाटियों, बुग्यालो, वेशभूषाओं, मातृभाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, धार्मिक यात्राओं, चोटियों, पहाड़ी फलों, खाद्यान्नों, रीति-रिवाजों के बारे में पढ़ता हूं तो खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूं कि मैंने देवभूमि उत्तराखंड के […]