October 20, 2020
Home Archive by category संस्मरण (Page 8)

संस्मरण

संस्मरण

गर्मियों की छुट्टी और रोपणी की बखत 

ममता गैरोला जून की भीषण गर्मी में पहाड़ स्वर्ग की सी अनुभूति है. खेतों की लहलहाती हवा, धारा (पानी का स्रोत) से बहता ठंडा पानी, लोगों में आपसी मेलजोल और साथ ही सांस्कृतिक रीति-रिवाज पहाड़ों की जीवन शैली का अद्भुत दर्शन कराती है और इस अनुभूति को हम सिर्फ तब ही नहीं महसूस करते जब […]
संस्मरण

लोक की आवाज – हीरा सिंह राणा

मीना पाण्डेय आज से कुछ 18-20 साल पहले हीरा सिंह राणा जी से अल्मोड़ा में ‘मोहन उप्रेती शोध समिति’ के  कार्यक्रम के दौरान पहली बार मिलना हुआ. ‌तब उनकी छवि मेरे किशोर मस्तिष्क में ‘रंगीली बिंदी’ के लोकप्रिय गायक के रूप में रही. उसके बाद दिल्ली आकर कई कार्यक्रमों में लगातार मिलना हुआ. मध्यम कद-काठी […]
संस्मरण

पहाड़ों में ब्याह-बारात की सामूहिकता

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—21 प्रकाश उप्रेती आज बात उस पहाड़ की जो आपको अकेले होने के एहसास से बाहर रखता है. वो पहाड़ जो आपको हर कदम पर सामूहिकता का बोध कराता है. हमारे लिए ‘गौं में ब्याह’ (गाँव में शादी) किसी उत्सव से कम नहीं होता था. खासकर लड़की की शादी […]
संस्मरण

सबको स्तब्ध कर गया दिनेश कंडवाल का यों अचानक जाना

भूवैज्ञानिक, लेखक, पत्रकार, प्रसिद्ध फोटोग्राफर, घुमक्कड़, विचारक एवं देहरादून डिस्कवर पत्रिका के संस्थापक संपादक दिनेश कण्डवाल का अचानक हमारे बीच से परलोक जाना सबको स्तब्ध कर गया. सोशल मीडिया में उनके देहावसान की खबर आते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से लेकर हर पत्रकार एवं आम लोगों द्वारा उन्हें अपने—अपने स्तर और ढंग से श्रद्धांजलि दी […]
संस्मरण

कुछ लोग दुनिया में खुशबू की तरह हैं

देश—परदेश भाग—4 डॉ. विजया सती बुदापैश्त में हिन्दी की तमाम गतिविधियों की बागडोर मारिया जी लम्बे समय से संभाले हुए हैं. डॉ मारिया नैज्येशी! बुदापैश्त में प्रतिष्ठित ऐलते विश्वविद्यालय के भारोपीय अध्ययन विभाग की अनवरत अध्यक्षा! मारिया जी विश्वविद्यालय स्तर पर प्राचीन यूनानी, लैटिन और संस्कृत भाषाएँ पढ़ रही थी जब अपने गुरु प्रोफ़ेसर तोत्तोशि […]
संस्मरण

हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष चारु तिवारी मैं तब बहुत छोटा था. नौंवी कक्षा में पढ़ता था. यह 1979-80 की बात है. बाबू (पिताजी) ने बताया कि दुनिया के एक बहुत बड़े वैज्ञानिक आज बग्वालीपोखर में आ रहे हैं. बग्वालीपोखर में उन दिनों सड़क […]
संस्मरण

चीड़ को इस नज़र से भी देखना होगा

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—20 प्रकाश उप्रेती पहाड़ की हर चीज आपको कुछ न कुछ देती है. पहाड़ के लोगों का हर पेड़, ढुङ्ग (पत्थर), भ्योव (पहाड़), गढ्यर, और झाड़ियों से एक रिश्ता होता है. आज बात करते हैं- ‘सोह डाव’ (चीड़ के पेड़) और उसकी धरोहर- ‘ठिट'(चीड़ का फल) और ‘छिलुक’ (आग […]
संस्मरण

अपनेपन की मिठास कंडारी बंधुओं का ‘कंडारी टी स्टाल’

डॉ. अरुण कुकसाल चर्चित पत्रकार रवीश कुमार ने अपनी किताब ‘इ़श्क में शह़र होना’ में दिल से सटीक बात कही कि ‘’मानुषों को इश्क आपस में ही नहीं वरन किसी जगह से भी हो जाता है. और उस जगह के किन्हीं विशेष कोनों से तो बे-इंतहा इश्क होता है. क्योंकि बीते इश्क की कही-अनकही बातें […]
संस्मरण

पप्पू कार्की: सुरीली आवाज का जादूगर

चारु तिवारी हम लोग उन दिनों राजधानी गैरसैंण आंदोलन के लिये जन संपर्क करने पहाड़ के हर हिस्से में जा रहे थे. हमारी एक महत्वपूर्ण बैठक हल्द्वानी में थी. बहुत सारे साथी जुटे. कुमाऊं क्षेत्र के तो थे ही गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों से भी कई साथी आये थे. हमारे हल्द्वानी के साथी सीए सरोज […]
संस्मरण

पेट पालते पेड़ और पहाड़ 

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—19 प्रकाश उप्रेती आज बात उस पहाड़ की जो आपको भूखे नहीं रहने देता था. तस्वीर में आपको- तिमिल और कोराय के पेड़ नज़र आ रहे हैं. तिमिल की हमारे यहां बड़ी मान्यता थी. गाँव में तिमिल के तकरीबन 10-12 पेड़ थे. कहने को वो गाँव के अलग-अलग लोगों […]