February 27, 2021
Home Archive by category संस्मरण (Page 12)

संस्मरण

संस्मरण

बुदापैश्त डायरी-3

देश—परदेश भाग—3 डॉ. विजया सती विभाग में हमारे पास एक बहुत ही रोचक पाठ-सामग्री थी, यह विभाग के पहले विजिटिंग प्रोफ़ेसर हिन्दी लेखक असग़र वजाहत जी के सहयोग से मारिया जी ने तैयार की थी. इसका नाम था– विनोद. बाद में इन पाठों का पुस्तक रूप में प्रकाशन हुआ. ये पाठ विनोद के माध्यम से […]
संस्मरण

पहाड़ का वह इंत्यान 

हम याद करते हैं पहाड़ को… या हमारे भीतर बसा पहाड़ हमें पुकारता है बार-बार? नराई दोनों को लगती है न! तो मुझे भी जब तब ‘समझता’ है पहाड़ … बाटुइ लगाता है…. और फिर अनेक असम्बद्ध से दृश्य-बिम्ब उभरने लगते हैं आँखों में… उन्हीं बिम्बों में बचपन को खोजती मैं फिर-फिर पहुँच जाती हूँ […]
संस्मरण

पुरखे निहार रहे मौन, गौं जाने के लिए तैयार है कौन?

ललित फुलारा सुबह-सुबह एक तस्वीर ने मुझे स्मृतियों में धकेल दिया. मन भर आया, तो सोशल मीडिया पर त्वरित भावनाओं को उढ़ेल दिया. ‘हिमॉंतर’ की नज़र पढ़ी, तो विस्तार में लिखने का आग्रह हुआ. पूरा संस्मरण ही एक तस्वीर से शुरू हुआ और विमर्श के केंद्र में भी तस्वीर ही रही. तस्वीर के बहाने ही […]
संस्मरण

आत्मनिर्भर पहाड़ की दुनिया

प्रकाश उप्रेती मूलत: उत्तराखंड के कुमाऊँ से हैं. पहाड़ों में इनका बचपन गुजरा है, उसके बाद पढ़ाई पूरी करने व करियर बनाने की दौड़ में शामिल होने दिल्ली जैसे महानगर की ओर रुख़ करते हैं. पहाड़ से निकलते जरूर हैं लेकिन पहाड़ इनमें हमेशा बसा रहता है। शहरों की भाग-दौड़ और कोलाहल के बीच इनमें ठेठ […]
संस्मरण

“ऊम” महक गॉंव की

सुमन जोशी उत्तराखंड में खेती व अनाज से जुड़े न जाने कितने ही त्यौहार, कितने की रीति—रिवाज़ और न जाने कितनी ही मान्यताएं हैं. पर हर एक मान्यता में यहां की संस्कृति व अपनेपन की झलक देखने को मिलती है. कृषि प्रधान प्रदेश होने के कारण यहाँ हर एक फसल के बोने से लेकर के काटने […]
संस्मरण

वड़ और एक नारी की पीड़ा

डॉ. गिरिजा किशोर पाठक गांव की कहावत है ‘वड़ (Division stone), झगड़ जड़’. जब दो भाइयों के बीच में जमीन का बंटवारा होता है तो खेतों के बीच बंटवारे के बाद विभक्त जमीन में एक लम्बा पत्थर खड़ा करके गाड़ दिया जाता है जिसे वड़ (division line) कहते हैं. भाइयों में जमीन के बंटवारे पर […]
संस्मरण

पहाड़ की संवेदनाओं के कवि कन्हैयालाल डंडरियाल

पुण्यतिथि (2 जून) पर विशेष चारु तिवारी  हमारे कुछ साथी उन दिनों एक अखबार निकाल रहे थे. दिनेश जोशी के संपादन में लक्ष्मीनगर से ‘शैल-स्वर’ नाम से पाक्षिक अखबार निकल रहा था. मैं भी उसमें सहयोग करता था. बल्कि, संपादक के रूप में मेरा ही नाम जाता था. यह 2004 की बात है. हमारे मित्र […]
संस्मरण

इंतज़ार… पहाड़ी इस्टाइल

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—8 रेखा उप्रेती हुआ यूँ कि मेरी दीदी की शादी दिल्ली के दूल्हे से हो गयी. सखियों ने “…आया री बड़ी दूरों से बन्ना बुलाया” गाकर बारात का स्वागत किया और नैनों की गागर छलकाती दीदी दिल्ली को विदा कर दी गयी. आसपास के गाँवों या शहरों में ब्याही गयी लडकियाँ […]
उत्तराखंड संस्मरण

ईजा के जीवन में ओखली

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—14 प्रकाश उप्रेती ये है-उखो और मुसो. स्कूल की किताब में इसे ओखली और मूसल पढ़ा. मासाब ने जिस दिन यह पाठ पढ़ाया उसी दिन घर जाकर ईजा को बताने लगा कि ईजा उखो को ओखली और मुसो को मूसल कहते हैं. ईजा ने बिना किसी भाव के बोला […]
संस्मरण

बुदापैश्त डायरी-2 : भाषा का पुल

डॉ विजया सती दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से हाल में ही सेवानिवृत्त हुई हैं। इससे पहले आप विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हिन्दी – ऐलते विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी में तथा प्रोफ़ेसर हिन्दी – हान्कुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरन स्टडीज़, सिओल, दक्षिण कोरिया में कार्यरत रहीं। साथ ही महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, पुस्तक समीक्षा, संस्मरण, आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। विजया