September 20, 2020
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पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा

कुछ अच्छी बातें सिर्फ गरीबी में ही विकसित होती हैं…

डॉ. अरुण कुकसाल ‘बाबा जी (पिताजी) की आंखों में आंसू भर आये थे. मैंने नियुक्ति पत्र उनके हाथौं में दिया तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया. वह बहुत कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे. सिर्फ़ मेरे सिर पर हाथ फेरते रहे… मैं उसी विभाग में प्रवक्ता बन गया […]
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ट्यूलिप के फूल कहानी संग्रह

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… डॉ. विजया सती सुपरिचित लेखिका एम.जोशी हिमानी का नवीनतम कहानी संग्रह है– ट्यूलिप के फूल जो भावना प्रकाशन दिल्ली से 2020 में प्रकाशित हुआ. इससे पहले लेखिका एक कविता संग्रहों के अतिरिक्त उपन्यास ‘हंसा आएगी जरूर’ और कहानी संग्रह ‘पिनड्रॉप साइलैंस’ भी दे चुकी हैं. जीवन के आरंभिक पंद्रह वर्ष […]
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गागर में सागर भरती है ज्ञान पंत की कविता

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… रेखा उप्रेती ज्ञान पंत जी की फेसबुक वॉल पर सेंध लगाकर कुछ ‘कणिक’ चख लिए तो ‘टपटपाट-सा’ पड़ गया. जिज्ञासा स्वाभाविक थी, ‘किताब’ कहाँ से मिलेगी!! संकेत समझ कर ज्ञान दा ने झट ‘भिटौली’ वाले स्नेह के साथ अपने दोनों काव्य-संग्रह भिजवा दिए… ‘कणिक’ और ‘बाटुइ’… कुमाउनी में रचित इन […]
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बचपन की यादों को जीवंत करती किताब

 ‘मेरी यादों का पहाड़’ डॉ. अरुण कुकसाल ‘आ, यहां आ. अपनी ईजा (मां) से आखिरी बार मिल ले. मुझसे बचन ले गई, देबी जब तक पढ़ना चाहेगा, पढ़ाते रहना.’ उन्होने किनारे से कफन हटाकर मेरा हाथ भीतर डाला और बोले ‘अपनी ईजा को अच्छी तरह छू ले.’ मैंने ईजा (मां) के पेट पर अपनी हथेली […]
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आत्मकथा में बस ‘अ’ और ‘ह’ बाकी कथा

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… प्रकाश उप्रेती किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला, कटा ज़िंदगी का सफर धीरे-धीरे. जहाँ आप पहुँचे छ्लांगे लगाकर, वहाँ मैं भी आया मगर धीरे-धीरे.. रामदरश मिश्र जी की इन पंक्तियों से विपरीत यह आत्मकथा है. स्वयं उनका जिक्र भी आत्मकथा में है. आत्मकथा ‘स्व’ से सामाजिक होनी की कथा […]
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जो मजा बनारस में, न पेरिस में, न फारस में…

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… प्रकाश उप्रेती इस किताब ने ‘भाषा में आदमी होने की तमीज़’ के रहस्य को खोल दिया. ‘काशी का अस्सी’ पढ़ते हुए हाईलाइटर ने दम तोड़ दिया. लाइन- दर- लाइन लाल- पीला करते हुए कोई पेज खाली नहीं जा रहा था. भांग का दम लगाने के बाद एक खास ज़ोन में […]