January 26, 2021
Home Archive by category जल विज्ञान (Page 3)

जल विज्ञान

जल विज्ञान

महिलाएं भी करती थी मानसूनी वर्षा की भविष्यवाणियां

भारत की जल संस्कृति-13 डॉ. मोहन चंद तिवारी प्राचीन भारतीय जलवायु विज्ञान का उद्भव तथा विकास भारतवर्ष के कृषितन्त्र को वर्षा की भविष्यवाणी की जानकारी देने के प्रयोजन से हुआ. इसलिए वैदिक काल से लेकर उत्तरवर्ती काल तक भारत में जलवायु विज्ञान की अवधारणा कृषि विज्ञान से जुड़ी रही है. भारत के
जल विज्ञान

“जलवैज्ञानिक वराहमिहिर और उनका मानसून वैज्ञानिक ‘वृष्टिगर्भ’ सिद्धांत”

भारत की जल संस्कृति-12 डॉ. मोहन चंद तिवारी वैदिक संहिताओं के काल में ‘सिन्धुद्वीप’ जैसे वैदिक कालीन मंत्रद्रष्टा ऋषियों के द्वारा जलविज्ञान और जलप्रबन्धन सम्बन्धी मूल अवधारणाओं का आविष्कार कर लिए जाने के बाद वैदिक कालीन जलविज्ञान सम्बन्धी ज्ञान साधना का उपयोग करते हुए कौटिल्य ने एक महान अर्थशास्त्री और जलप्रबंधक के रूप में राज्य […]
जल विज्ञान

कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में कृषिमूलक जलप्रबन्धन और ‘वाटर हारवेस्टिंग’

भारत की जल संस्कृति-11 डॉ. मोहन चन्द तिवारी (7 फरवरी, 2013 को रामजस कालेज, ‘संस्कृत परिषद्’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘संस्कृत: वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य’ में मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य “कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जलप्रबन्धन और वाटर हारवेस्टिंग” से सम्बद्ध लेख) वैदिक काल और बौद्ध काल तक कृषि व्यवस्था के विकास के साथ साथ राज्य के […]
जल विज्ञान

सिन्धु सभ्यता के ‘धौलवीरा’ और ‘लोथल’ का जल प्रबंधन

भारत की जल संस्कृति-10 डॉ. मोहन चन्द तिवारी धौलवीरा का जल प्रबन्धन सन् 1960 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग ने सिन्धु सभ्यता से सम्बद्ध एक प्राचीन आवासीय बस्ती धौलवीरा का उत्खनन किया तो पता चला कि यह सभ्यता 3000 ई.पू. की एक उन्नत नगर सभ्यता थी. खदिर द्वीप के उत्तर-पश्चिम की ओर वर्तमान गुजरात में […]
जल विज्ञान

“सिन्धु सभ्यता के ‘हड़प्पा’ और ‘मोहन जोदड़ो’ नगरों  का जलप्रबंधन”

डॉ. मोहन चन्द तिवारी दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हैं। वैदिक ज्ञान-विज्ञान के गहन अध्येता, प्रो.तिवारी कई वर्षों से जल संकट को लेकर लिखते रहे हैं। जल-विज्ञान को वह वैदिक ज्ञान-विज्ञान के जरिए समझने और समझाने की कोशिश करते हैं। उनकी चिंता का केंद्र पहाड़ों में सूखते खाव, […]
जल विज्ञान

आज भी प्रासंगिक हैं वैदिक जल विज्ञान के सिद्धात

भारत की जल संस्कृति-8 डॉ. मोहन चन्द तिवारी देश में इस समय वर्षा ऋतु का काल चल रहा है.भारतीय प्रायद्वीप में आषाढ मास से इसकी शुरुआत  हो जाती है और सावन भादो तक इसका प्रभाव रहता है.आधुनिक मौसम विज्ञान की दृष्टि से इसे ‘दक्षिण-पश्चिमी मानसूनों’ के आगमन का काल कहते है,जिसे भारतीय ऋतुविज्ञान में ‘चातुर्मास’ […]
जल विज्ञान

पहाड़ों में जल परम्परा : आस्था और विज्ञान के आयाम

डॉ. मोहन चंद तिवारी दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हैं। वैदिक ज्ञान-विज्ञान के गहन अध्येता, प्रो.तिवारी कई वर्षों से जल संकट को लेकर लिखते रहे हैं। जल-विज्ञान को वह वैदिक ज्ञान-विज्ञान के जरिए समझने और समझाने की कोशिश करते हैं। उनकी चिंता का केंद्र पहाड़ों में सूखते खाव, […]