April 17, 2021
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किस्से/कहानियां

किस्से/कहानियां

कमिश्नर मातादीन और झिमरू

लघुकथा डॉ. गिरिजा किशोर पाठक  कमिश्नर मातादीन साहब को मन ही मन यह बात कचोट रही है कि वे झिमरू के भरोसे कैसे लुट गये.  झिमरु की निष्ठा पर विश्वास और अविश्वास के अन्तर्द्वन्द में वे कुलबुला रहे हैं. विगत दस साल से झिमरू इनके  साथ है. वह एक सजग और जागरुक प्रहरी है. किसी […]
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आब कब आलै ईजा…

डॉ. रेखा उप्रेती  ‘‘भलि है रै छै आमाऽ…’’ गोठ के किवाड़ की चौखट पर आकर खड़ी आमा के पैरों में झुकते हुए हेम ने कहा. ‘‘को छै तु?’’ आँखें मिचमिचाते हुए पहचानने की कोशिश की आमा ने… ‘‘आमा मी’’ हेम… ‘‘को मी’’… ‘‘अरे मैं हेम… तुम्हारा नाती..’’ आमा कुछ कहती तभी बाहर घिरे अँधेरे से […]
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अपने पहाड़ लौटने का सपना अपने साथ  ही ले गई प्यूलीं

डॉ. कुसुम जोशी         फ्यूंली (प्यूंली) के खिलते ही पहाड़ जी उठे, गमक चमक उठे पहाड़ पीले रंग की प्यूंली से, कड़कड़ाती ठन्ड पहाड़ से विदा लेने लगी, सूखे या ठन्ड से जम आये नदी नालों में पानी की कलकल ध्वनि लौटने लगी, फ्यूंली के साथ खिलखिला उठी प्रकृति, रक्ताभ से बुंराश, राई […]
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कहां ले जाऊँ…

लधु कथा डॉ. कुसुम जोशी         सवि ने धीरे से कराहते हुये आंखें खोली,  चारों और नजरें घुमाई तो अपने को अस्पताल में पाया. “मैं यहां..कैसे..! ” सोचती रही सावि… धीरे-धीरे सब कुछ याद आ रहा था उसे, उसका और जगन का प्रेम राज नहीं रहा,  घर में तूफान उठान में आ चुका […]
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सरुली और चाय की केतली….

लघु कथा अमृता पांडे सरुली चाय की केतली से because निकलती भाप को एकटक देख रही थी. पत्थरों का ऊंचा नीचा आंगन, एक कोने पर मिट्टी का बना कच्चा जिसमें सूखी लकड़ियां जलकर धुआं बनकर गायब हो जातीं. चाय उबलकर काढ़ा हो गई थी पर सरुली ना जाने किन विचारों में निमग्न थी. because न […]
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हर लड़की का एक सपनों का राजकुमार होता है…

मंजु पांगती “मन”   यात्राएं कई प्रकार की होती हैं. because जीवन यात्रा, धार्मिक यात्रा, पर्यटन यात्रा, प्रेम यात्रा. जीवन में जब ये यात्राएं घटित होती हैं तो परिवेश में दृष्टिगोचर होती ही हैं. इन सब के साथ एक यात्रा और और होती है हर समय होती है जो दिखाई नहीं देती महसूस की जाती […]
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निर्णय

लधु कथा डॉ. कुसुम जोशी रात को खाना खात हुऐ जब बेटी because अपरा के लिये आये रिश्ते का जिक्र भास्कर ने किया तो… अपरा बिफर उठी, तल्ख लहजे में बोली “आप को मेरी शादी के लिये लड़का ढूढ़ने की जरुरत नही.” फोन क्यों…? मम्मी पापा so दोनों साथ ही बोल पड़े… “मैंने अपने लिये […]
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रनिया की तीसरी बेटी

कहानी मुनमुन ढाली ‘मून’ आंगन में चुकु-मुकु हो कर बैठी, because रनिया सिर पर घूंघट डाले, गोद मे अपनी प्यारी सी बेटी को दूध पिलाती है और बीच-बीच मे घूंघट हटा कर, अपने आस -पास देखती है और उसके होठों पर एक हल्की सी मुस्कान छलक जाती है. सप्तेश्वर रनिया की सास गुस्से में तमतमाई […]
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अपेक्षायें

लघु कथा डॉ. कुसुम जोशी  “ब्वारी मत जाया करना रात सांझ उस पेड़ के तले से… अपना तो टक्क से becauseरस्सी में लटकी और चली गई, पर मेरे लिये और केवल’ के लिये जिन्दगी भर का श्राप छोड़ गई. श्राप तीन साल से एक रात भी हम मां बेटे चैन से नही सोये… but आंखें […]
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शुभदा

कहानी डॉ. अमिता प्रकाश यही नाम था उसका शुभदा! शुभदा-शुभता प्रदान करने वाली. शुभ सौभाग्य प्रदायनी. हँसी आती है आज उसे अपने इस नाम पर और साथ ही दया के भाव भी उमड़ पड़ते हैं उसके अन्तस्थल में, जब वह इस नाम को रखने वाले अपने पिता को याद करती है…. कितने लाड़ और गर्व […]