January 23, 2021
Home Archive by category कविताएं

कविताएं

कविताएं

क्यों रिश्तों को छीन रहे हो?

भुवन चन्द्र पन्त छीन लिया है अमन चैन सब, जब से तुमने पांव पसारे। हर घर में मेहमान बने हो, सिरहाने पर सांझ-सकारे।। भुला दिये हैं तुमने अब तो, रिश्तों के संवाद सुरीले। सारे रिश्ते धता बताकर, बन बैठे हो मित्र छबीले।। सब के घर में रहने पर भी, ऐसी खामोशी है छाई। बतियाते हैं […]
कविताएं

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ!

सुधा भारद्वाज “निराकृति” अबोध भूली बाल स्वभाव वह… बहती थी सरिता सम वह… क्या सोच उसे समाज की… कुछ अजब रूढ़ी रिवाज की… परिणाम छूटी शि क्षा उसकी… नही हुई पूरी कोई आस उसकी… सपने देखे बहुत बड़े-बड़े थे… रिश्ते तब सब आन अड़े थे… छूट गयी सभी सखी सहेली… जीवन बना था एक पहेली… […]
कविताएं

आओ! ऐसे दीये जलायें 

भुवन चन्द्र पन्त आओ ! ऐसे दीये जलायें गहन तिमिर की घुप्प निशा में तन-मन की माटी से निर्मित गढ़ कर दीया मात्र परहित में परदुख कातरता से चिन्तित स्नेह दया का तेल मिलायें आओ! ऐसा दीया जलायें दीवाली के दीये से केवल होता है बाहर ही जगमग गर अन्तर के दीप जला लो ज्योर्तिमय […]
कविताएं

आमरऽ उत्तराखंड क हाल

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2020 (रवांल्टी कविता ) अनुरूपा “अनुश्री” उत्तराखण्ड बणी के कति साल हइगे, बेरोजगार यो पहाड़ी मुलुकई रइगो. कति पायो कति खोयो यूं सालु पोडो, त पु किचा न पड्यो आमार पला ओडो. इक्कीस साल बिचिगे यां आस मा, कि किचा रोजगार आलो कतरांई त आमर हातु मा. जियूं नेताऊं क बाना यो राज्य […]
कविताएं

प्यारा उत्तराखंड

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2020 आदेश सिंह राणा  केदारखण्ड और मानसखण्ड, देवभुमि है मेरी उत्तराखंड. पहाड़ों और फूलों की घाटी, वीर धरा है मेरी राज्य की माटी. प्रदेश में मेरे मिलता है ऐसा सुकून, लगता है माँ का आँचल. देवभूमि के नाम से विख्यात है, यह है अपना प्यारा उत्तरांचल. गढ़वाल और कुमाऊँ दो खंड […]
कविताएं

क्या यही राज्य हमने मांगा था

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2020 धीरेन्द्र सिंह चौहान खटीमा मसुरी रामपुर तिराह में हुआ आंदोलनकारियों का  हत्या कांड उन शहीदों के बदौलत है आज उत्तराखंड, जिन्होंने हिलाया था ब्रह्मांड राज्य बनाने की खातिर आंदोलनकारी रहे सलाखों में खाई लाठी और गोलियां सलामत रहेगी कब तक देवभूमि में भ्रष्टाचार अधिकारी, शराब माफियों की टोलियां मंत्री, संतरी […]
कविताएं

अपना गाँव

अंकिता पंत गाँवों में फिर से हँसी ठिठोली है बुजुर्गों ने, फिर किस्सों की गठरी खोली है. रिश्तों में बरस रहा फिर से प्यार मन रहा संग, खुशी से हर त्यौहार. गाँवों में फिर से खुशियाँ छाई हैं परदेसियों को बरसों बाद, घर की याद आई है. महामारी एक बहाना बन कर आ गई खाली […]
कविताएं

लोकतंत्र

भारती आनंद तानाशाही का अंत हुआ, फिर भारत में लोकतंत्र आया. जनता के द्वारा शासन यह, जनता का शासन कहलाया. जनता के हित की ही खातिर, नव नियमों का विधान किया. जन अधिकारों को आगे रखा, संविधान इसे नाम दिया. जन-जन की बात सुनेगा जो, जन-जन के लिए जियेगा जो. उसको ही चुनेंगे अपना शासक, […]
कविताएं

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

कविता ‘करुणा’ कोठारी जिसे गर्भ में भी सम्मान न मिला, जो कभी फूलbecause बनकर न खिला। उसके अस्तित्व so का नया दौर चलाओ, बेटी बचाओ,because बेटी पढ़ाओ! जिसके होने सेbecause जगत का अस्तित्व, उसके होने परbut छायी उदासी, काश! उसके so दर्द का हिस्सा, तुम्हें भी पहुंचाता चोट जरा-सी चाहे मंदिरों में because पूजा न […]