April 17, 2021
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कविताएं

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पाती प्रेम की

यामिनी नयन गुप्ता इतिहास के पन्नों में जाकर कालातीत होने को अभिशप्त हो गई परीपाटी चिट्ठियों की वह सुनहरा दौर, डाकिए का इंतजार साइकिल की घंटी डाक लाया का शोर, अब नजर नहीं आतीं लाल रंग की पत्र पेटियां प्रियतम की पाती का दौर; बूढ़ी आंखों की प्रतीक्षा कुशलक्षेम का समाचार, गौने की राह तकती […]
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अपेक्षा/उपेक्षा

निमिषा सिंघल अपेक्षाएं पांव फैलाती हैं… जमाती हैं अधिकार, दुखों की जननी का हैं एक अनोखा…. संसार। जब नहीं प्राप्त कर पाती सम्मान, बढ़ जाता है क्रोध… आरम्पार, दुख कहकर नहीं आता.. बस आ जाता है पांव पसार। उलझी हुई रस्सी सी अपेक्षाएं खुद में उलझ.. सिरा गुमा देती हैं। भरी नहीं इच्छाओं की गगरी…. […]
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होली के रंग…

होली पर की कल्याण सिंह चौहान दो कविताएं  1. होली के रंग रंग ले रंग ले, तन रंग ले, तन रंग ले, तु मन रंग ले, होली के रंग रंग ले।। रंग ले रंग ले…. रंग ले रंग ले, दुनिया के रंग ले रंग ले, रंग ले रंग ले, दुनिया अपने रंग रंग ले, रंग […]
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उड़ान

डॉ. दीपशिखा वो भी उड़ना चाहती है. बचपन से ही चिड़िया, तितली और परिंदे उसे आकर्षित करते. वो बना माँ की ओढ़नी को पंख, मारा करती कूद ऊँचाई से. उसे पता था वो ऐसे उड़ नहीं पायेगी फिर भी रोज़ करती रही प्रयास. एक ही खेल बार-बार. उसने उम्मीद ना छोड़ी, एक पल नहीं, कभी नहीं. उम्मीद उसे आज भी है, बहुत है मगर अब वो ऐसे असफल प्रयास नहीं करती.
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आंदोलन के नाम पर अराजकता

उमेद सिंह बजेठा गणतंत्र दिवस हमारा पर्व है, सभी धर्मों संप्रदायों का गर्व है. हमने ही जय जवान तथा, जय किसान का नारा दिया. फिर क्यों आज किसान ने, जवान पर तलवार से प्रहार किया. लाल किला राष्ट्रीय स्मारक है, राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है. इसकी सुरक्षा व सम्मान प्रत्येक, भारतीय का कर्तव्य पुनीत […]
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क्यों रिश्तों को छीन रहे हो?

भुवन चन्द्र पन्त छीन लिया है अमन चैन सब, जब से तुमने पांव पसारे। हर घर में मेहमान बने हो, सिरहाने पर सांझ-सकारे।। भुला दिये हैं तुमने अब तो, रिश्तों के संवाद सुरीले। सारे रिश्ते धता बताकर, बन बैठे हो मित्र छबीले।। सब के घर में रहने पर भी, ऐसी खामोशी है छाई। बतियाते हैं […]
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ!

सुधा भारद्वाज “निराकृति” अबोध भूली बाल स्वभाव वह… बहती थी सरिता सम वह… क्या सोच उसे समाज की… कुछ अजब रूढ़ी रिवाज की… परिणाम छूटी शि क्षा उसकी… नही हुई पूरी कोई आस उसकी… सपने देखे बहुत बड़े-बड़े थे… रिश्ते तब सब आन अड़े थे… छूट गयी सभी सखी सहेली… जीवन बना था एक पहेली… […]
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आओ! ऐसे दीये जलायें 

भुवन चन्द्र पन्त आओ ! ऐसे दीये जलायें गहन तिमिर की घुप्प निशा में तन-मन की माटी से निर्मित गढ़ कर दीया मात्र परहित में परदुख कातरता से चिन्तित स्नेह दया का तेल मिलायें आओ! ऐसा दीया जलायें दीवाली के दीये से केवल होता है बाहर ही जगमग गर अन्तर के दीप जला लो ज्योर्तिमय […]
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आमरऽ उत्तराखंड क हाल

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2020 (रवांल्टी कविता ) अनुरूपा “अनुश्री” उत्तराखण्ड बणी के कति साल हइगे, बेरोजगार यो पहाड़ी मुलुकई रइगो. कति पायो कति खोयो यूं सालु पोडो, त पु किचा न पड्यो आमार पला ओडो. इक्कीस साल बिचिगे यां आस मा, कि किचा रोजगार आलो कतरांई त आमर हातु मा. जियूं नेताऊं क बाना यो राज्य […]
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प्यारा उत्तराखंड

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2020 आदेश सिंह राणा  केदारखण्ड और मानसखण्ड, देवभुमि है मेरी उत्तराखंड. पहाड़ों और फूलों की घाटी, वीर धरा है मेरी राज्य की माटी. प्रदेश में मेरे मिलता है ऐसा सुकून, लगता है माँ का आँचल. देवभूमि के नाम से विख्यात है, यह है अपना प्यारा उत्तरांचल. गढ़वाल और कुमाऊँ दो खंड […]