September 23, 2020
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आजकल

आजकल इतिहास उत्तराखंड संस्मरण

अब न वो घुघुती रही और न आसमान में कौवे

हम लोग बचपन में जिस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते थे वह दिवाली या होली नहीं बल्कि ‘घुघुतिया’ था। प्रकाश चंद्र भारत की विविधता के कई आयाम हैं इसमें बोली से लेकर रीति-रिवाज़, त्योहार, खान-पान, पहनावा और इन सबसे मिलकर बनने वाली जीवन पद्धति। इस जीवन पद्धति में लोककथाओं व लोक आस्था का बड़ा […]
आजकल समसामयिक

तार-तार होती गांवों की परंपरा, घर-घर पैदा हो रहे नेता

पंचायत चुनाव किस्त— 1 शशि मोहन रवांल्टा मारी तो शरीप कंसराओ… मारी तो शरीप ये उंच बौख क डांडा कंसराओ ह्यू पड़ी बरिफ ये।। कंसराओ (कंसेरू) भटाओ (भाटिया) केशनाओ (कृष्णा)…. हेड़ खेलण जाणू ये…. कंसराओ, भटाओ, केशनाओ…. तीन गांवों का यह गीत अपने आप में एक बहुत ही गहन संदेश छिपाए हुए है, जिसमें तीन […]
आजकल

शहीदों को समर्पित फोटोग्राफी व पेंटिंग प्रदर्शनी

— वाई एस बिष्ट इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट गैलरी, नई दिल्ली में 16 से 18 फरवरी को फोटोग्राफी और पेंटिंग प्रदर्शनी ‘अनुभूति’ का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम इनक्रेडिबल आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन द्वारा किया गया, इसमें कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रकार की फोटोग्राफी लगाई गई थी, जो प्रकृति, नाइट स्काई इत्यादि थी. इसी […]