January 20, 2021
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समूचे विश्व को सम्मोहित किया है गीता के मानवतावादी चिंतन ने

गीता जयंती पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी     भारतीय कालगणना के because अनुसार मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को प्रतिवर्ष गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है. इस बार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार गीता जयंती की 5157वीं वर्षगांठ 25 दिसंबर 2020 को मनाई जा रही है. ब्रह्मपुराण के अनुसार, द्वापर युग
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गीता का संदेश…

गीता जयंती  (25 दिसम्बर) पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र आज के दौर में चिंता, अवसाद और तनाव निरन्तर बढ रहे हैं. बढती इछाओं की पूर्ति न होने पर क्षोभ और कुंठा होती है. तब आक्रोश और हिंसा  का तांडव शुरू होने लगता है. because दुखद बात तो यह है कि सहिष्णुता और धैर्य कमजोर पड़ने […]
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भारतीय काल गणना में ‘अधिमास’ की अवधारणा

डॉ. मोहन चंद तिवारी इस वर्ष 18 सितंबर से ‘अधिमास’ प्रारंभ becauseहो चुका है,जो 16 अक्टूबर को समाप्त होगा.और 17 अक्टूबर से नवरात्र प्रारम्भ होंगे. यह ‘अधिमास’,’अधिक मास’, ‘मलमास’ और ‘पुरुषोत्तम मास’ आदि नामों से भी जाना जाता है. ‘अधिमास’ के कारण इस बार दो आश्विन मास पड़े हैं. साथ ही चतुर्मास भी पांच
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पितृपक्ष में पितरों का ‘श्राद्ध’ क्यों किया जाता है? 

डॉ. मोहन चंद तिवारी इस साल 1 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है,जिसका समापन 17 सितंबर, 2020 को होगा. भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों का पितृपक्ष प्रतिवर्ष ‘महालय’ श्राद्ध पर्व के रूप में मनाया जाता है. ‘निर्णयसिन्धु’ ग्रन्थ के अनुसार आषाढी कृष्ण अमावस्या से पांच पक्षों के […]
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पितृपक्ष : पितरों की समाराधना का पर्व

डॉ. मोहन चंद तिवारी इस वर्ष 1 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 17 सितंबर, 2020 को होगा. उल्लेखनीय है कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों का पितृपक्ष पूरे देश में ‘महालय’ श्राद्ध पर्व के रूप में मनाया जाता है.आमतौर पर पितृपक्ष 16 दिनों का […]
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पितरों के प्रति आस्था का पर्व – श्राद्ध एवं हवीक

भुवन चन्द्र पन्त पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किये जाने वाला कर्म ही श्राद्ध है. दरअसल पितर ही हमें इस धरती पर लाये, हमारा पालन पोषण किया और हमें अपने पांवों पर खड़े होने के लिए समर्थ किया. लेकिन उनसे ऊपर भी हमारे ऋषि थे, जो हमारे आदिपुरूष रहे और जिनके नाम पर हमारे गोत्र चले […]
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मेरी ओर देखो

भूपेंद्र शुक्लेश योगी धरती के भीतर का पानी शरीर के “रीढ़ की हड्डी के पानी” जैसा होता है, रीढ़ की हड्डी का पानी जिसे CSF (Cerebrospinal Fluid) कहते हैं जो मस्तिष्क व रीढ़ आधारित अंगों के क्रियान्वयन के लिए अमृत समान है ….! सामान्यतः मस्तिष्क में ट्यूबरक्लोसिस के संबंध जानकारी प्राप्त करने के लिए CSF जाँच […]