September 22, 2020
संस्मरण

 जहां विश्वास है, वहां प्यार है!

बुदापैश्त डायरी-12

  • डॉ. विजया सती

विदेश में हम अपनी भाषा भी पढ़ाते हैं और अपने देश से भी परिचित कराते हैं – क्योंकि आखिरकार तो देश की पूरी तस्वीर देनी है हमें ! जैसे हमारा अध्यापन अपने देश के परिचय से जुड़ा रहता है, उसी तरह दूसरे देश का पूर्ण परिचय भी हमारा लक्ष्य होता है. बहुत सी बातें दोनों देशों में समान–असमान होकर भी एक-दूसरे से जुड़ने में मदद करती हैं. जैसे हमारे देश की खासियतें वैसे ही हंगरी की भी. तो हंगरी की कहानी कुछ खासियतों के उल्लेख बिना अधूरी रहेगी ..

बुदापैश्त के पास ही है सेंत ऐंद्रे …पर्वतों से घिरा, नदी किनारे का शांत प्रांत, जहां पथरीली पतली पत्थर गलियाँ हैं, कलाकारों की बस्ती है, कलावीथियां और संग्रहालय हैं. यहाँ पहुँचने के लिए नदी के रास्ते या ट्रेन सेखूबसूरत सफ़र करते हैं, यहां ऐतिहासिक इमारतें, चर्च और रंग भरे बाज़ार हैं ! अपने देश से दूर आए परदेशी को और तमाम पर्यटकों को भी, मन लगाने के लिए और क्या चाहिए?

सेंत ऐन्द्रे

स्कैंजन बुदापैश्त शहर से बाहर एक लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है – यह एक तरह से लोकग्राम ‘फोक विलेज’ जैसा है, जो देश की विकासमान जीवन शैली, पहनावे, खानपान और रहन-सहन का सजीव प्रदर्शन करता है. यह आधुनिक जीवन के बरक्स पुराने जीवन में झाँक लेने का मनोरम झरोखा है .

डैन्यूब बेंड यानी दुना नदी का आकर्षक घुमाव भी दर्शनीय स्थल की सूची में ऊपर रखा जाएगा. नदी के साथ-साथ यह यात्रा हमें पुराने समय के किलों की नगरी विशेग्राद ले जाती है, इस ओर जाते हुए हम एक नए देश स्लोवाकिया को भी छू लेते हैं ! हरी-भरी पर्वत श्रृंखलाओं के तल में बहती दुना नदी हमें ऋषिकेश में गंगा की याद दिलाती है, तो हम जैसों की दिनभर की यात्रा को और मधुर बना जाती है !

डैन्यूब बेंड

लांगोश.. हंगरी का भरपूर खाया जाने वाला स्ट्रीट फ़ूड है जो कुछ-कुछ हमारे भटूरे से मेल खाता है, बस उसके साथ छोले नहीं हैं. बल्कि है लहसुन की बढ़िया चटनी .. उनका गार्लिक पेस्ट जिसके साथ लांगोश को रैप और रोल करके खाया जाता है.

चारनोक  हंगरी का खुला बाजार है, जहां फल, सब्जियां, स्मृति चिन्ह, मिठाई और भी बहुत कुछ मिल जाता है …ढूंढना कुछ पड़ता ही नहीं, बस देखते रहिए, खरीदते रहिए, सब हमारे सामने खुला रहता है.

बुदापैश्त में हैं तो सेचेन्यी बाथ की भी याद करें. हंगरी स्पा की नगरी भी कही जाती है. बहुत से स्नानागारों के बीच हंगरी में सल्फर बाथ भी विख्यात हैं. बुदापैश्त का एक आकर्षण यहां का सबसे प्रसिद्ध सेचेन्यी बाथ है. टिकट बना कर प्रवेश करें और औषधीय गुणों से युक्त जलकुंडों में तैरें, खेलें, गपशप करें, थकान हर लेने वाली मसाज लें.. हंगरी वासियों के साथ-साथ पर्यटक भी इसका भरपूर आनंद लेते हैं !

सेचेन्यी बाथ

तमाम स्मृति चिन्हों की भीड़ में हंगेरियन पेपरिका की चर्चा करना जरूरी है यह विशेष मिर्च पाउडर ख़ास है जो आकर्षक, अधिकतर लाल पैकिंग में मिलता है – डिब्बे भी और पाउच भी.

यदि कभी कोई मेला लगा हो और वहां मिल जाए, तो  हंगरी की सर्वश्रेष्ठ भेंट मुझे यह पारंपरिक  Home Blessing लगती है …

“Where faith is, there is love,
where love is, there is peace,
where is peace, there is blessing,
where blessing is there is God,
where God is there is no need!

अधिकतर तो यह हंगेरियन हस्तशिल्प का सुन्दर नमूना होता है ..सुंदर कढ़ाई की जाती है कपड़े पर रंग-बिरंगे धागों से !

अब देखिए कितनी समानता है ..दो देशों के जीवन और समाज में ! यह हमें भाषा की समानता की ओर देखने को भी प्रेरित करती है.

(लेखिका दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज की सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर (हिन्दी) हैं। साथ ही विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हिन्दी – ऐलते विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी में तथा प्रोफ़ेसर हिन्दी – हान्कुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरन स्टडीज़, सिओल, दक्षिण कोरिया में कार्यरत रही हैं.कई पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, पुस्तक समीक्षा, संस्मरण, आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं.)

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