उत्तराखंड हलचल

डाक्टरों की नियुक्ति की राह देख रहा है अल्मोड़ा राजकीय मेडिकल कालेज

अल्मोड़ा : सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान मेडिकल कालेज तैनाती के बाद डाक्टरों की नियुक्ति की राह देख रहा है। नौ डाक्टरों की नियुक्ति होने के बाद भी अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। नौ डाक्टरों को शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। जिसके चलते अब तक कालेज में फैकल्टी नहीं बढ़ सकी है।

अल्मोड़ा मेडिकल कालेज के अस्तित्व में आने के बाद फैकल्टी की समस्या शुरू से ही बनी रही। हालांकि पूर्व में यहां 48 से अधिक फैकल्टी पहुंच गई थी। जूनियर और सीनियर डाक्टर भी काफी संख्या में थे। प्रथम एलओपी के तहत कालेज को मान्यता के लिए 52 फैकल्टी की जरूरत थी। लेकिन 45 से भी कम फैकल्टी में कालेज को मान्यता मिल गई। बीते दिनों कुछ और फैकल्टी ने कालेज छोड़ दिया। जिसके बाद यहां 41 फैकल्टी रह गई। आचार संहिता के बाद कालेज में डाक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी हुए। जिसमें कालेज को प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत कुल नौ डाक्टरों मिले। नौ डाक्टरों की नियुक्ति होने के साथ ही यहां फैकल्टी 50 के पास पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन अब तक शासन स्तर से इसे हरी झंडी नहीं मिल सकी है। नियुक्ति के बाद तैनाती के लिए मामला शासन स्तर पर लंबित है। जिसके चलते अप्रैल की शुरुआत में भी डाक्टरों की नियुक्ति नहीं हो सकी।

डायलीसिस अब हंस फाउंडेशन की ओर से संचालित

अल्मोड़ा मेडिकल कालेज के बेस अस्तपाल में स्थापित डायलीसिस अब हंस फाउंडेशन की ओर से संचालित होने लगा है। फाउंडेशन की ओर से डाक्टर और अन्य कर्मी सेवाएं दे रहे हैं। जिससे यहां हर रोज डायलीसिस की सुविधाएं मिलने लगी हैं। अब तक मेडिकल कालेज के अधीन डायलीसिस केंद्र में सप्ताह में कुछ दिन ही सेवाएं मिल पाती थी।

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